Young
Generation chapter 2...
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हमारे भारत देश के अंदर किस चीज की कमी है , जरा सोच कर बताना , सब कुछ है जिसे हम यह कह सके की "मेरा भारत महान"
लेकिन हम दुनिया की बात करते है तो हम अक्सर पूछे क्यूं रहते है , माना कुछ मामलों में हम अच्छा कर रहे है , मगर जो पीछे छोड़ रहे है उसका क्या , लोकमत 📰 न्यूजपेपर में यक न्यूज आई थी गुजरात में , न्यालय के लिए शिपाई की भर्ती हो रही थी , और हैरान होने वाली बात यह है कि शीपाई भर्ती के लिए PHD . doctors , engineer,s
ऐसे उच्च शिक्षित बच्चे भी लाइन में खड़े दिखाई दिए , इतनी बुरी गलत हो चली है इस देश कि , करे भी तो क्या करे , जहा पर एक सीट होती है वहा हजारों एप्लिकेशन आ जाते है , इतनी मात्रा में बेरोजगारी बढ़ चुकी है , इसका कोई तो हल होना चाहिए , युवा पीढ़ी हमारे देश का भविष्य है , निव है हमारे देश की नीव में ही खराबी होगी तो देश टिक नहीं पाएगा , सरकार काफी कोशिश कर रही है बेरोजगारी हटाने के लिए , युवा पीढ़ी को सही मार्ग दिखा रही है , पर इतनी कोशिश काफी नहीं है , अगर हमें बेरोजगारी कम करनी है तो शुरवात हमारे बचपन से होनी चाहिए , बचपन से ही education की तरफ कम और skill की तरफ ज्यादा ध्यान होना चाहिए , बढ़े होते ही यह बात दिमाग से निकाल दो की सरकारी नौकरी लग जाएगी , यह सोचो की हम खुद ऐसा क्या कर सकते है , खुद का ही कुछ शुरू करो , यह बात दिमाग में डाल दो की कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता ,
कमाने में कोई शर्म नहीं , लेकिन हमें शर्म तब आणि चाहिए जब हमारी पढ़ाई डॉक्टर , इंजिनियर के लेवल की है और हम काम कर रहे है चपरासी का , यही काम करना था तो 5-10 लाख रुपए पढ़ाई में खर्च क्यूं किय इससे अच्छा उन पैसों में छोटा मोटा बिज़नेस शुरू करते , यह बात समझ नी होगी , आज की कंडीशन बहुत बेकार हो चली है , रोज अखबारों में खबरे छप रही है , जो लोग नौकरी पर है उन्हे भी नौकरी से निकाल दिया जा रहा है तो , जो लोग नौकरी तलाश रहे है उन्हे मिल पाएगी क्या नौकरी जरा सोच कर देखना , मैंने बात की थी 18-27 उमर के बच्चे यहां पर दो बाते साफ हो जाती है यह उमर मतलब , गलत और सही यह दो चीजों में। से फैसला करना होता है कि हम क्या चुनेंगे , अगर बच्चो ने इस उमर में खुद के दिल को मार दिया तो ओ कहीं न वी कहीं सही रास्ते पर होते है , मगर ऐसा नहीं होता , लड़का हो या लड़की इस उमर में उनका यक गलत कदम कहीं बार उनकी जिन्दगी तक बर्बाद कर देता है , आज कल यह बहुत सुनने में आता है मेरा ब्रेकअप हुआ , वगैरा कुछ बच्चे तो उस चीज को हल्के में ले लेते है और भूल भी जाते है , पर कुछ बच्चे दिल से लगा लेते है और कहीं मामलों मै तो यह फैसला सुसाइड तक चला जाता है , और मा - बाप सिर्फ सोचते रहते है ऐसे कैसे हुआ , मेरा बेटा मेरी बेटी ऐसा कर है नहीं सकती , दुःख होता है मुझे उस वक्त जब ध्यान देना चाइए तब तो दिया नहीं , घर वालो को पता होना चाहिए उनके बच्चे घर के बाहर क्या करते है ,कहा जाते है , किससे मिलते है , आप बच्चो की जासूसी करो यह नहीं कह रहा मै पर कभी काबर जरूरी भी होता है , बहुत बार बाहर क्या हुआ यह बात बच्चे मा - बाप को बताने से डरते है , गलतियां होती है , किससे नहीं होती पर मा - बाप को बच्चो की गलतियां नहीं अच्छाइयां देखनी चाहिए , गलतियां ढूंढोगे तो उस भगवान में भी नजर आ एगी , बच्चो के साथ अगर बाहर कुछ बुरा होता है और ओ बात मा - बाप को बता नहीं पाते तो इससे बड़ी शर्म कि बेटा मा - बाप के लिए और कुछ भी नहीं , बच्चो को समजाना नहीं समजना सीखो , जिस दिन आप बच्चो को समज पाओगे उस दिन बच्चे आपसे कोई भी बात छुपाएंगे नहीं , बच्चो का सबसे करीब दोस्त मा - बाप होना चाइए , ना कि दूसरे, बच्चो को फ्री डम देना चाइए पर वो भी लिमिट में ...।
बच्चो को भी यह बात समज नी चाइए प्यार करना गलत नहीं होता , पर कब करना चाइए इसकी भी समज़ होनी चाहिए ,पहले अपने करियर की तरफ बाद में प्यार तो चलते रहता है , यह बात मै इसलिए बता पा रहा हूं क्यूं की मै ने जिन्दगी को काफी करीब से देखा है , उसे समजा है , कम उम्र में जिन्दगी की ओ गहराई देखी है जिसके लिए लोगो की उम्र बीत जाती है , इसलिए सोचो , समझो , अमल करो ,
आज के लिए इतना ही मिलते है ऐसे ही एक नाय टॉपिक के साथ मेरे अगले ब्लॉग में ,
🤗 खुश रहो हसते रहो 🤗


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