Monday, 6 January 2020

TRAFIC SIGNAL



      TRAFFIC
          SIGNAL     

HY FRIENDS - how are you , i think everything is all right -
    आज हम बात करने वाले है ट्रैफिक सिग्नल पर , जी है सही सुना ,आपको शायद पता नहीं होगा लेकिन ,ट्रैफिक सिग्नल हमारे रोज मर्रा के जिंदगी में बहुत अहम् भूमिका निभाता है। 
हम सब इतना तो जानते है ,
   red light - stop
     yellow light - see
    green light - go

लेकिन इसके आलावा भी और कही बाते है जिसपर हम कभी ध्यान नहीं देते ,
रोजाना हम रस्ते से आते - जाते रहते है ,सिग्नल पर रुकते है और फिर आगे निकल जाते है। 
लेकिन उस सिग्नल पर हमारे आलावा भी कुछ खास लोग होते है , जो कि सिग्नल रेड होने का इंतजार करते है ,और जैसे ही रेड सिग्नल हुआ तो एक चलती फिरति मार्केट  सिग्नल पर उतर जाती है ,जि हा  मय बात कर रहा हु  सिग्नल पर काम कर रहे लोगो की , गजरेवाली , कलैंडर वाला , कपडे वाला , पेन बेचने वाला ,हैंडी कैप , ऐसे कही अलग अलग क़िस्म के लोग हमें देखने को मिलते है ,और उस 60 सेकंड के बिच हम लोग उन के कस्टमर होते जबर - दस्ती के कस्टमर जो हम लोगो को कोई न कोई चीज चिपका कर चले जाते है। 
        और कुछ अतरंगी लोग ऐसे भी होते है जिनका बर्ताव दिन के टाइम अलग और रात के टाइम  अलग देखने को मिलता है , हम कहीं बार समज भी नहीं पाते और ऐसे लोग हमे चुना लगाकर चले जाते है। हम उनके बातो में ऐसे फस जाते है मानो  ओ  जो बोल रहे है सह बोल रहे है.  
    ऐसे - ऐसे नमूने होते हैं न की क्या बताऊ ,लेकिन साथ में यह भी समज गया , की यह लोग जो कुछ भी करे है अपना पेट भरने के लिए करते है , दिन भर पैसे कमाते है और रात  में उस कमाई का  25 प्रसेन्ट  कमीशन इनके दलाल को देना  पड़ता है , जी हा ,रोड पर सिग्नल पर जो भी काम करता है भिक मांगता है इनके ऊपर एक दलाल होता है जो इन लोगो पर नजर रखता है और इनकी छोटी - छोटी परेशानी हल करता है हर एक दलाल का एक इलाका होता है और उस इलाके का ओ राजा होता है उसके आलावा और कोई हफ्ता वहा  से ले नही सकता  ... 
      और उन दलाओ के ऊपर भी एक बॉस  होता है जो इन दलाओ से महीने में एक बार हफ्ता लेता है ,इसे  हम लोग चैन सिस्टम कह सकते है  ,एक के ऊपर एक - एक के ऊपर एक कोई न कोई होता है ,और सभ साथ मिलकर काम करते है  ,ओ  लोग हम से ज्यादा से ज्यादा पैसे कैसे निकाल  सके इसकी उनके पास कोइन कोई तरकीब हमेशा तैयार होती है , कभी रस्ते पर गटर फट  जाता है ,कभी रस्ते पर गड्ढे खड़वाय जाते है, कभी बैलो  को रास्ते पर छोड़ दिया जाता है तकी ट्रैफिक  जैम हो। 
      ट्रैफिक जैम होगा तो उन लोगो को अपना सामान बेचने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा , 
मतलब कुछ भी बे वजह यहाँ नहीं होता ,आप शायद नहीं जानते 1800  crore  का बिजनेस है इन लोगों का  , कहने को तो 1 रु - 5 रु  - 10  रु  यह लोग  चिलर जमा करते है , लेकिन इस चैन का आखरी छोर  जिसके पास है ओ  करोडो कमाता   है , 

   आप लोगो ने कही ऐसे भी लोग देखे होंगे सिग्नल पर - रस्ते पर जिनके हात -पैर  नहीं होते , आखे नहीं होते  ,90 / परसेंट लोग अपनी मर्जी  से हात - पैर  कटवाते है  अपने मर्जी से आखे निकलवाते है ताकि हम लोग न पर दया कर सके और ो सुकून से भिक मांग  सके और उस कटे हुए हात - पैर  आखो की मार्केट  में बड़े अस्पतालों में अछि कीमत लगाई जाती है , शार्ट में कहे तो यह भी एक तरह का इणलिगल  व्यापर करते है , इतना ही नहीं हम छोटे बचो को भि रस्ते पर भिक मांगते देखते है , उन बचो को अलग - अलग राज्यों से मगवाया जाता है या फिर अपहरण कर के लाया जाता है और कहु बार तो इन बचो को अपंग बनाकर रस्ते पर छोड़ दिया जाता है भिक मांगने  ,इन में कही बचो का कभी  भी पता नहीं चल पता कहा से आय थे। 
       और जब रस्ते पर इनकी  अपघात में मौत  हो जाती है तब इनकी बॉडी  को साइंस कॉलेज  - विध्यपीठो  में भेज दिया जाता है ताकि स्टूडेंट  इन पर अपनी ट्रेनिंग कर सके ,
    घिनोना है लेकिन सच यही  है। ... 
जितना भि लिखू कम है इन लोगो के बारे में , यह लोग गरीब ही सही लेकिन हर पर हसने का खुश रहने का बहाना धुंद  ही लेते है ,और ख़ुशी - ख़ुशी अपने जिँदगी काटने की कोशिस करते है। ... 

                                                              

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